शादी का रजिस्ट्रेशन कैसे होता है, और ये क्यों जरूरी हैं ?

शादी का पंजीकरण आज समय की माँग है। भारत में लगभग अब हर धर्म के लोगों के लिए इसे अनिवार्य कर दिया गया है। फिर भी लोग अभी जागरूक नहीं हैं। शादी का रजिस्ट्रेशन कैसे होता है (Shaadi Ka Registration Kaise Hota Hai) और शादी का रजिस्ट्रेशन क्यों जरूरी है तथा इसके क्या लाभ हैं? और इसकी प्रक्रिया क्या है, आईये विस्तार से जानें इस लेख में।

Shaadi Ka Registration Kaise Hota Hai?

Shaadi Ka Registration Kaise Hota Hai
Shaadi Ka Registration Kaise Hota Hai

शादी के रजिस्ट्रेशन के लाभ 

शादी का रजिस्ट्रेशन करवाना आज के समय में बहुत अहम है। मैरिज सर्टिफिकेट (Marriage certificate)- विवाह का कानूनी प्रमाण है। अगर शादी के बाद नाम या सरनेम नहीं बदलना चाहते तो शादी से संबंधित सभी कानूनी अधिकार और लाभ दिलाने में इससे मदद मिलती है।

इससे शादी के बाद बैंक में जॉइंट अकाउंट खुलवाने, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने, स्पाउस वीजा हासिल करने, जॉइंट प्रॉपर्टी लेने जैसे तमाम कार्यों के लिए शादी का प्रमाण-पत्र जरूरी हो जाता है। इसके अलावा दंपती में से कोई एक धोखाधड़ी करे तो इस प्रमाण-पत्र की मदद से थाने में रिपोर्ट करवाई जा सकती है।

तलाक के लिए अपील करनी हो या गुजारा भत्ता लेना हो, हर स्थिति में मैरिज सर्टिफिकेट काम आता है। मैरिज सर्टिफिकेट से कई तरह की परेशानियों से बचा जा सकता है। शादी में धोखाधडी, बाल विवाह और तलाक जैसे तमाम मामलों में मैरिज सर्टिफिकेट होने मात्र से स्त्री के अधिकार सुरक्षित हो जाते हैं। इसका सबसे ज्य़ादा फायदा स्त्रियों को है।

शादी का रजिस्ट्रेशन कैसे होता है ? (Shaadi Ka Registration Kaise Hota Hai)?

हिंदू विवाह अधिनियम (1955) या विशेष विवाह अधिनियम (1954) में से किसी एक के तहत शादी को पंजीकृत किया जा सकता है। हिंदू विवाह अधिनियम केवल हिंदुओं पर लागू होता है, जबकि स्पेशल मैरिज एक्ट भारत के समस्त नागरिकों पर लागू होता है।

शादी के रजिस्ट्रेशन हेतु जरूरी दस्तावेज

  • पति-पत्नी के हस्ताक्षर वाला विवाह पंजीकरण का आवेदन पत्र
  • आयु या जन्म का प्रमाण-पत्र
  • आवासीय प्रमाण-पत्र (आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या पैन कार्ड – इनमे से कोई एक )
  • शादी के फोटोग्राफ जोड़े में (वर – वधु)
  • शादी का कार्ड
  • यदि लडकी शादी के बाद सरनेम बदलना चाहती है तो एक नॉन-ज्यूडिशियल स्टांप पेपर चाहिए जिस पर पति-पत्नी द्वारा अलग-अलग एफिडेविट हो। इन सभी दस्तावेजों पर राजपत्रित अधिकारी का हस्ताक्षर और मोहर जरूरी है।

और फिर सभी दस्तावेजों के साथ जिले के कलेक्टर ऑफिस में जाकर आवेदन पत्र प्राप्त करें और फिर आवेदन पत्र को बड़ी ही सावधानी के साथ सभी बातो का सही सही जवाब भरें।

शादी के बाद नाम या सरनेम में कोई बदलाव हुआ हो तो आवेदन-पत्र में नया नाम दर्ज करें। इसका प्रमाण संलग्न करें।

इस फॉर्म पर गवाहों के हस्ताक्षर कराएं, जो कि आपके रिश्तेदार या दोस्त हो सकते हैं। गवाहों का विवरण मसलन, आपका उनसे क्या रिश्ता है, वे कौन हैं, कहां रहते हैं, क्या करते हैं। उनका पूरा पता और फोन नंबर का होना भी जरूरी है।

यह सारी प्रक्रिया होने के बाद रजिस्ट्रेशन ऑफिस में सभी दस्तावेजों को प्रस्तुत करना होगा। वहां सारे डॉक्यूमेंट्स की जांच होगी। हस्ताक्षर करवाने के बाद इन पर रजिस्ट्रेशन ऑफिस की मुहर लगेगी। आवेदन के 30 दिन के बाद आपको आपका मैरिज सर्टिफिकेट प्राप्त हो जाएगा।

ऑनलाइन विवाह रजिस्ट्रेशन कैसे कराएं?

अब कई राज्यों में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है। इसके लिए हिंदू विवाह पंजीकरण सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। विवाह का पंजीकरण ऑनलाइन करने के लिए आपको सम्बन्धित प्रदेश की ऑफिशियल गवर्नमेंट वेबसाइट पर जाने से लिंक मिल जाएगा। 

गवर्नमेंट की ऑफिशियल वेबसाइट से आप अपने जिले का चयन करें, जहां आप अभी रह रहे हैं। वेबसाइट पर एक ऑप्शन दिखेगा ‘मैरिज सर्टिफिकेट फार्म’ वहां पर क्लिक करके आप अपना आवेदन फॉर्म भरें। ध्यान रहे आवेदन फॉर्म में सही-सही इंफॉर्मेशन भरे, उसके बाद ही आप एप्लीकेशन सबमिट करें। तत्पश्चात विवाह रजिस्ट्रेशन के लिए एक तारीख मिलेगी। एप्लीकेशन फॉर्म सबमिट करने के बाद आपको एक्नॉलेजमेंट स्लिप मिलेगी जिसका प्रिंट आउट आप अवश्य ले लें।

रजिस्ट्रेशन टाइपरजिस्ट्रेशन में लगने वाले दिन 
.हिंदू विवाह अधिनियम15 दिन 
.विशेष विवाह अधिनियम60 दिन

उपरोक्त तरीकों से आप अपना मैरिज सर्टिफिकेट आसानी से पा सकते हैं।
     
महत्वपूर्ण लिंकhttps://www.onlinemarriageregistration.com/


 

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