पूजा पाठ का नियम, जाने नित्य घर में पूजा पाठ कैसे करें ?

पूजा पाठ का नियम (Puja Path Ka Niyam): वैसे तो कहा जाता है की भगवान आपके भाव के भूखे है आपके धन और ऐश्वर्य के नहीं। पर भगवान को अगर हम अपने अच्छे और नियमित पूजा से प्रसन्न करना चाहते है तो भी उसकी जानकारी होना उतना ही जरूरी है जितना आपके अंदर अच्छे भाव का आना। लेकिन आजकल प्रायः लोग अपनी पूजा जैसे तैसे पूरा कर लेते है। तो कई बार लोग पूछते हैं कि घर पर नियमित पूजा कैसे करें और किस देवता की पूजा करनी चाहिए ?

पूजा पाठ का नियम (Puja Path Ka Niyam)

पूजा पाठ का नियम
Puja Path Ka Niyam

तो इस संक्षिप्त लेख के माध्यम से जानेंगे की घर में रोज पूजा पाठ का आरम्भ कैसे करना चाहिए और कैसे संपन्न करना चाहिए। 

घर पर दैनिक पूजा कैसे करें ? (daily pooja vidhi at home)

प्रतिदिन पूजा का एक समय निश्चित करें और प्रतिदिन उसी समय पर पूजा करें। प्रतिदिन नहा कर, साफ कपड़े पहनें, साफ जमीन पर आसन बिछाकर उस पर बैठे। जमीन पर सीधे बैठकर पूजा नहीं करनी चाहिए। हो सके तो आसान कुश का नहीं तो ऊनी आसन पर बैठें।

भगवान की पूजा करते समय दिशा का भी ध्यान रखें। आपका मुख पूर्व, उत्तर या उत्तर पूर्व की ओर होना चाहिए। पूजा के लिए कभी भी तांबे के बर्तन में चंदन नहीं रखें। चावल को दीपक के नीचे रखें। हिंदू धर्म में प्रतिदिन पंच देवों की पूजा करने विधान है। ये पांच देवता हैं – श्री गणेश, सूर्य देव, देवी दुर्गा, भगवान शंकर और भगवान विष्णु हैं। 

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शुद्ध आसन पर बैठकर सुबह-शाम पूजा करना नित्य पाठ का नियम कहा जाता है। जिसका क्रम इस प्रकार होना चाहिए –

1. सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें – विघ्नों को दूर करने के लिए

2. सूर्य देव की पूजा – स्वास्थ्य के लिए

3. भगवती मां की पूजा – शक्ति के लिए

4. भगवान शंकर की पूजा – भक्ति के लिए और सभी प्रकार के शारीरिक और मानसिक कष्टों और विपत्तियों से मुक्ति के लिए

5. उसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। 

पूजा के बाद अपने आसन के नीचे पानी की 2 बूंद डालकर अपने माथे पर लगाएं, फिर अपने स्थान से उठ जाएं। नहीं तो आपकी जगह इंद्रदेव को, पूजा का फल मिल जाएगा।

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कुछ अनुभूत नित्य नियम


1. नारायण कवच या हनुमान चालीसा एक प्रसिद्ध और लोकप्रिय उपाय है, इसका रोजाना कम से कम तीन बार पाठ करने से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और अटका हुआ काम बन जाता है।

2. दरिद्रता नाश के लिए मां लक्ष्मी के श्री सूक्त या लिंगाष्टक का पाठ करना चाहिए।

3. रोग से मुक्ति और कर्ज से मुक्ति के लिए गजेंद्र मोक्ष और नवग्रह की नियमित पूजा करनी चाहिए।

4. यदि कोई व्यक्ति प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार करवाता है, तो उसे अनंत कोटि के फल मिलते हैं।

5. अगर कोई मंदिर में आरती के लिए धुप-दीप की व्यवस्था करता है, तो उसे प्रसिद्धि मिलती है।

6. यदि कोई व्यक्ति गाय के लिए चारे और पानी की और पक्षियों के लिए दाना की व्यवस्था करे, तो उसके घर से सभी दुर्भाग्य दूर हो जाते हैं।

7. जो लोग देवताओं को भोग लगाकर ब्राह्मणों और साधुओं को प्रसाद बांटते हैं, उनके जन्म जन्मान्तर के कष्ट और पाप नष्ट हो जाते हैं।

8. यदि कोई व्यक्ति विद्यालय या अस्पताल बनाता है या निर्माण में योगदान देता है और उसकी सेवा करता है, तो उसे सदबुद्घि और भगवान की कृपा मिलती है, लेकिन अपने स्वार्थ या नाम के प्रचार के लिए, जो उपरोक्त कार्य करके अहंकार करता है, तो उसके सारे कर्म निष्फल हो जाते हैं।

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