नीलम कब धारण करना चाहिए? जाने किन राशियों को नीलम देता है सुख और शांति

नीलम कब धारण करना चाहिए (Neelam Kab Dharan Karna Chahiye): ज्योतिष शास्त्र में रत्नों में नीलम को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना गया है। नीले रंग के इस रत्न की जितनी कीमत होती है, उतनी इसकी गुणवत्ता भी होती है। इसे बिना किसी प्रतिष्ठित ज्योतिषी की सलाह के धारण नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह लाभ भी देता है और हानि भी, तो आईये जाने नीलम कब धारण करना चाहिए व नीलम रत्न किस राशि को धारण करना चाहिए तथा नीलम रत्न के फायदे और नुकसान के बारे में – 

नीलम कब धारण करना चाहिए (Neelam Kab Dharan Karna Chahiye)

नीलम कब धारण करना चाहिए
Neelam Kab Dharan Karna Chahiye

नीलम रत्न किस राशि को धारण करना चाहिए

मेष राशि के लिए शनि दशम और एकादश भाव का स्वामी है। दोनों शुभ भाव है। एकादश भाव में स्वामित्व के कारण शनि को राशि के लिए शुभग्रह नहीं माना जाता है। परंतु शनि द्वितीय, चतुर्थ, पंचम, नवम, दशम, एकादश या लग्न (राशि) में स्थित हो तो शनि की महादशा में नीलम धारण करने से हर दशा में लाभ होगा। 

वृष राशि के लिए शनि नवम और दशम भावों का स्वामी होने कारण अत्यंत शुभ और योग कारक ग्रह माना गया है। इसके धारण करने से सदा सुख-संपदा, समृद्धि, मान-प्रतिष्ठा तथा धन की प्राप्ति होती है। यदि नीलम लग्नेश रत्न हीरे के साथ धारण किया जाए, तो अति लाभकारी होता है। 

मिथुन राशि का शनि अष्टम और नवम का स्वामी होता है। नवम त्रिकोण का स्वामी होने से इस राशि के लिए शुभ माना गया है। यदि शनि की महादशा में यह रत्न धारण किया जाए तो लाभदायक होगा। यदि नीलम को पन्ने के साथ धारण किया जाए, तो अति उत्तम होगा। 

कर्क राशि के लिए शनि सप्तम (मारक स्थान) और अष्टम भावों का स्वामी होने कारण अशुभ ग्रह माना जाता है। शनि लग्नेश का मित्र भी है। अतः इस राशि के जातक को नीलम कभी नहीं धारण करना चाहिए। 

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सिंह राशि के लिए शनि षष्ठ और सप्तम भावों का स्वामी होने कारण अशुभ माना गया है। शनि लग्नेश सूर्य का शत्रु भी है अतः इस जातक को नीलम धारण नहीं करना चाहिए। 

कन्या राशि के लिए शनि पंचम और षष्ठ भावों का स्वामी होने के कारण इस राशि के लिए अशुभ ग्रह नहीं माना गया है। शनि की महादशा में इसका जातक नीलम धारण करके लाभ उठा सकता है। 

तुला राशि चतुर्थ और पंचम का स्वामी होने के कारण अत्यंत शुभ और योग कारक ग्रह माना गया है। यह  लग्नेश शुक्र का अभिन्न मित्र है। अतः इस राशि का जातक इस रत्न को धारण करके सब प्रकार का सुख प्राप्त कर सकता है। 

शनि की महादशा में यह विशेष रुप से फलदाई होता है। लग्नेश शुक्र के रत्न हीरे या नवम भाव के स्थायी बुध के रत्न पन्ने के साथ नीलम धारण करने से विशेष फलदाई होता है। 

वृश्चिक राशि के लिए शनि तृतीय और चतुर्थ का स्वामी है। शनि इस राशि के लिए शुभ ग्रह नहीं माना जाता है। तब भी यदि शनि चतुर्थ का स्वामी होकर पंचम, नवम, दशम और एकादश में हो तो शनि की महादशा में यह रत्न धारण किया जा सकता है, क्योंकि शनि और लग्नेश मंगल परस्पर मित्र नहीं है। एक अग्नि है दूसरा बर्फ। 

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धनु राशि के लिए शनि द्वितीय (मारक स्थान) और तृतीय भावों का स्वामी होने के कारण इस राशि के लिए अशुभ ग्रह माना गया है। इसके अतिरिक्त शनि लग्नेश वृहस्पति का शत्रु है, धनु राशि वालों को नीलम धारण नहीं करना चाहिए। 

मकर राशि लग्न और धनाभाव का स्वामी है। इस राशि के जातक को नीलम, सदा सुख और प्रसन्न पाने के लिए धारण करना चाहिए। 

कुंभ राशि के लिए शनि द्वादश का स्वामी होते हुए भी लग्नेश है। उसका मूल त्रिकोण राशि में पड़ता है। इसलिए कुंभ राशि के जातक को नीलम शुभ फल देगा। 

मीन राशि में शनि एकादश और द्वादश भाव का स्वामी होने कारण अशुभ ग्रह माना गया है। इसके अतिरिक्त शनि लग्नेश का शत्रु भी है, तब भी एकादश का स्वामी होकर शनि की महादशा में नीलम धारण करने से आर्थिक लाभ हो सकता है। पर इसके जातक को नीलम नहीं पहनना चाहिए। 

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