कृष्ण साधना, श्रीकृष्ण साधना से भी प्रसन्न होती हैं लक्ष्मी

कृष्ण साधना (Krishna Sadhana): वैभव लक्ष्मी प्राप्त करने के लिए श्री कृष्ण साधना सबसे उत्तम उपाय है। इस साधना को विधिवत संपन्न करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और अपनी कृपा से साधक को तृप्त करती हैं। अगर चाह हो कि घर में धन वृद्धि होती रहे, तो आप भी इस प्रयोग को कर सकते हैं –

कृष्ण साधना (Krishna Sadhana), कृष्ण भगवान की साधना कैसे करें?

कृष्ण साधना
Krishna Sadhana

प्रत्यक्ष: वासुदेव श्रीकृष्ण का लक्ष्मी से भले ही कोई संबंध न दिख रहा हो, परंतु सारा संसार जानता है कि श्रीकृष्ण विष्णु भगवान के अवतार हैं और भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी हैं। इसलिए यदि आप विष्णु अवतार वासुदेव श्रीकृष्ण की साधना करते हैं, तो अवश्य ही आप पर लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त होगी। 

जैसे, सुदामा जी श्री कृष्ण के सखा होने के साथ-साथ कृष्ण के भक्त भी थे। भले ही उन्हें अत्यंत कठोर कष्टों का सामना करना पड़ा हो परंतु आखिर में लक्ष्मी जी को उन पर कृपा करनी पड़ी। 

इसलिए शास्त्रों में वैभव लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए कृष्ण साधना को सबसे ज्यादा फलदायी माना गया है। जो भी साधक इस प्रयोग को निष्ठापूर्वक संपन्न करता है, उसके ऊपर लक्ष्मी जी की कृपा होने लगती है। 

इस प्रयोग को संपन्न करने वाला साधक दरिद्र कुल में पैदा होने पर भी बड़ी शीघ्रता से धन-वैभव की प्राप्ति करता है। उस पर मां लक्ष्मी की असीम कृपा होती है। इस साधना को करने वाले साधक के घर में षोडश लक्ष्मी जीवन पर्यंत निवास करती हैं, और धन वर्षा करती हैं। 

साधना सामग्री 

इसके लिए सिद्ध श्री लक्ष्मी नारायण यंत्र, स्फटिक श्रीयंत्र, वैजयंती माला, धूप-दीप और नैवेद्य आदि की जरूरत होती है।

साधना में जपा जाने वाला मंत्र है – ॐ ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं लक्ष्मी वासुदेवाय नमः।

इस मंत्र से प्रतिदिन 21 माला का जाप करें। इस प्रयोग को लगातार 11 दिन तक करें। 

पूजा-विधि 

यह 11 दिनों में संपन्न होने वाली साधना प्रयोग है। इस साधना का शुभारंभ जन्माष्टमी अथवा महीने के किसी भी बुधवार से किया जा सकता है। इस साधना को संपन्न करने का समय रात 10:00 बजे से के बाद कहा गया है। 

अतः जिस दिन से आपको साधना आरंभ करनी हो उस रात्रि में 10:00 बजे आप स्नान करें। तत्पश्चात पीले रंग के साफ स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इससे पूर्व भी जहां साधना करनी हो उस स्थान को साफ और स्वच्छ कर लें। 

उसके बाद उत्तर की ओर मुख करके बैठ जाएं। सामने बजोट पर पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर श्री लक्ष्मी नारायण यंत्र की स्थापना करें और पंचोपचार विधि से पूजन करें। श्री लक्ष्मी नारायण की बाई तरफ स्फटिक श्रीयंत्र की स्थापना करें और उसका भी पंचोपचार विधि से पूजा करें। 

अब मन ही मन मां लक्ष्मी और विष्णु का मन में ध्यान करें। यहां पर ध्यान करते समय भगवान विष्णु को कृष्ण के रूप में ध्यान करें। 

अब, ॐ ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं लक्ष्मी वासुदेवाय नमः का बैजयंती माला से निष्ठा पूर्वक 21 माला जाप करें। इस क्रम को लगातार ग्यारह दिनों तक जारी रखें। 11 दिनों के पश्चात 10 दिनों तक यंत्र और माला को पूजा स्थान पर ही रहने दें। 

इस तरह 21 दिनों तक साधना सामग्री को पूजा स्थल पर ही रहने दें। 22 वें दिन दोनों यंत्रों को उठाकर अपने तिजोरी या भंडार गृह में रख दें। इन यंत्र को नियमित धुप-दीप दिखाते रहें। बाकी अन्य पूजा सामग्री को बहते हुए  जल में प्रवाहित कर दें। इस तरह लक्ष्मीदायक श्री कृष्ण साधना से आप भी धनी हो सकते हैं। 

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