घर में पूजा कैसे करें, सच्ची भक्ति से होंगे सारे मनोरथ पूर्ण

घर में पूजा कैसे करें (Ghar Mein Puja Kaise Karen): देवी-देवताओं की पूजा कैसे हो ? उनको प्रसन्न करने के लिए कौन-सी विधि अपनाई जाए, इस तरह के कई सवाल आपके भी मन में उठते होंगे। आपकी इन्हीं दुविधाओं को दूर करने के लिए यहां पूजा संबंधी कुछ जरुरी बातें बताई जा रही हैं –

घर में पूजा कैसे करें (Ghar Mein Puja Kaise Karen) ?

घर में पूजा कैसे करें
ghar mein puja kaise karen

किसी-न-किसी देवी-देवता को आप भी मानते ही होंगे और प्रतिदिन पूजा भी करते होंगे। वैसे भी धार्मिक ग्रंथों में अपने इष्टदेव या देवी-देवताओं की पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है। यहां पूजा में शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखने की भी बात कही गई हैं। लेकिन इन सब के अतिरिक्त कुछ और सूक्ष्म बातें हैं जिनका ज्ञान आमतौर पर साधक को नहीं होता।

लेकिन सूक्ष्म और गूढ़ बातों का ध्यान रखकर देवताओं की पूजा-अर्चना करने से पूजा में पूर्णता आती है और वांछित फलों की प्राप्ति होती है। अगर आप भी अपने इष्ट को प्रसन्न करना चाहते हैं तो पूजा संबंधी बातों पर जरूर गौर करें –

भगवान की पूजा कैसे करें

  • घर या व्यवसायिक स्थल में पूजा का स्थान हमेशा ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में ही रखना चाहिए। क्योंकि वास्तु में इस दिशा को देव स्थान कहा गया है। 
  • पूजा हमेशा आसन पर बैठकर पूर्व दिशा में मुख करके ही करें।
  • ध्यान रखें, घर में शिवलिंग की स्थापना नहीं की जाती है। घर में केवल नर्बदेश्वर की पूजा या नर्बदेश्वर के साथ शालिग्रामजी की पूजा साथ-साथ की जा सकती है।
  • कभी भी तीन गणेश प्रतिमाओं की एक साथ पूजा न करें। 
  • दो गोमती चक्र, दो शालिग्रामजी, दो शंख और दो सूर्य भी पूजा घर में एक साथ नहीं रखना चाहिए।
  • तीन दुर्गा प्रतिमाओं को भी घर में एक साथ रखकर पूजा नहीं करें।
  • स्कंदपुराण के मुताबिक शालिग्रामजी की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा भी नहीं करनी चाहिए। इसे बिना प्रतिष्ठा के ही घर में रखकर पूजा-अर्चना की जा सकती है।
  • एक अन्य ग्रंथ के अनुसार तुलसी पत्र ऐसे दिन नहीं तोड़े, जिस दिन सूर्य संक्रांति हो या पूर्णिमा, द्वादशी, अमावस्या तिथि हो या रविवार, व्यतिपात, वैधृति योग हो । तुलसी पत्र रात्रि और संध्याकाल में भी नहीं तोड़ना चाहिए। क्योंकि इसका भी दोष होता है।

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  • लिंगपुराण में कहा गया है कि चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथियों और संक्रांति समय और सोमवार को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए।
  • भगवान गणपति को दूब प्रिय है, इसलिए इनकी पूजा में दूब का प्रयोग अवश्य किया जाना चाहिए। इससे भगवान गणपति प्रसन्न होते हैं। लेकिन, देवी मां को दूब चढ़ाना निषेध बताया गया है।
  • केसर चंदन को कभी भी तांबे के बर्तन में नहीं लेना चाहिए। जब भी देवताओं को चंदन या कुंकुम लगाना हो, तो सदैव दाहिने हाथ की अनामिका अंगुली से ही लगाएं।
  • घी का दीपक हमेशा देवताओं के दक्षिण में तथा तेल का दीपक बाएं तरफ जलाना चाहिए। इसी प्रकार धूपबत्ती बाएं तरफ और नैवेद्य देवताओं के सम्मुख रखें। हां, देवताओं को खंडित फल नहीं चढ़ाएं। जैसे- आधा केला, आधा सेव इत्यादि ।
  • पूजा के पश्चात् देशी घी से प्रज्जवलित दीपक से आरती अवश्य करें, यदि दीपक किसी कारणवश उपलब्ध नहीं हो, तो केवल जल आरती भी की जा सकती है। इतना ध्यान रखें कि आरती करने से पूजा में संपूर्णता आ जाती है। इसलिए पूजा करने के पश्चात् अवश्य आरती करें। तभी आपकी पूजा पूरी मानी जाएगी। 
  • देवताओं पर चढ़ा हुआ जल और पंचामृत को निर्माल्य कहा जाता है, जिसे पैरों से स्पर्श नहीं करें, क्योंकि इससे बहुत बड़ा पाप लगता है। इसे किसी पेड़ में विसर्जित कर दें ताकि उससे पैर न लगे। 

इस तरह उक्त छोटी-छोटी बातों का ध्यान कर आप अपनी पूजा को सफल बना सकते हैं।

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