दिशाशूल क्या है? दिशाशूल के उपाय – किस दिन किस दिशा में ना जाये?

दिशाशूल क्या है (dishashul kya hai)? धर्म ग्रंथों में 10 दिशाओं का वर्णन मिलता है, जिसके अनुसार ही ज्योतिष के कार्य संपन्न किये जाते है, परन्तु प्रमुख तौर पर हम आठ दिशाओं में ही यात्रा करते है, और दिशा शूल इन्ही दिशाओं की यात्रा में कष्ट या बाधा आने की दशा को कहते है। हर दिन किसी एक दिशा की ओर दिशाशूल होता है। जिस ओर हमें यात्रा नहीं करनी चाहिए। दिशाशूल लगना किसी भी दशा में अच्छा नहीं माना जाता, क्योंकि दिशाशूल लगने से स्वास्थ्य हानि, धनहानि और मानिसक शांति भंग होना अवसंभावी है।

दिशाशूल क्या है? किस दिन किस दिशा में ना जाये?

दिशाशूल क्या है?

अब प्रश्न उठता है कि ये बाधाये और कष्ट क्यों आते हैं ? तो हम यही कहेंगे की यही दिशा का शूल है यानि की दिशा द्वारा उचित ग्रह से मेल करते हुए दिन, यात्रा का न होना।

यह सब चुंबकीय खेल है ये सब हमारे ओरा पर निर्भर होता है। जैसा कि हम सभी जानते है हर दिन का किसी न किसी ग्रह से संबंध हैं। और हमारा ओरा दिन विशेष से मजबूती के साथ जुड़ा हुआ है। ऐसे में हम अगर किसी यात्रा पर बिना दिन और दिशा के मेल के ही निकल जाते है तो हमारी यात्रा में दिशा शूल लग जाता है। जिसका प्रभाव हमारे स्वास्थ्य, मति, धन और संबंधों पर पड़ता है, जिससे अनेको कष्ट भोगने पड़ते हैं।

तो जब भी लम्बी यात्रा पर निकले तो हमे पहले दिशा शूल पर विचार कर लेना चाहिए। परन्तु छोटी यात्रा यानि दिन भर की यात्रा(दिन भर में ही जाना और आना) में दिशाशूल का विचार नहीं किया जाता क्योंकि, उस दशा में दिशाशूल शून्य होता है।

किस दिन किस दिशा में ना जाये?

इस प्रश्न का उत्तर दिशाशूल चार्ट में मिल जायेगा, जिसमे दिशाशूल दिन वार बताया गया है की किस दिन किस दिशा में नहीं जाना है, यानि उस दिन, उस दिशा को छोड़ कर आप दूसरी दिशाओं में यात्रा कर सकते है।

दिशाशूल चार्ट

सोमवार व   शुक्रवार  -    पूर्व दिशा
मंगलवार व  बुधवार  -    उत्तर दिशा
गुरुवार                    -    दक्षिण दिशा
शुक्रवार व रविवार     -    पश्चिम दिशा
सोमवार व  गुरुवार    -    दक्षिण – पूर्व दिशा
मंगलवार को            -    उत्तर – पश्चिम दिशा
बुधवार व  शनिवार    -    उत्तर – पूर्व दिशा
रविवार व  शुक्रवार    -    दक्षिण – पश्चिम दिशा

ध्यान दें – उपरोक्त दिशाशूल चार्ट के अनुसार, अगर आपकी यात्रा में दिशाशूल लग रहा हो तो आप दिशाशूल के उपाय अपनाकर अपनी यात्रा शुरू कर सकते है।

दिशाशूल के उपाय

दिशाशूल के उपाय के तौर पर दिशाशूल के दोहे को प्रमुखता से समझ लेंना, आने वाली दिशा शूल की समस्याओं के प्रभाव को समाप्त कर सकता है।

“रवि को पान, सोम को दर्पण। मंगल को गुड़ करिये अर्पण॥
बुधे धनिया बीफ़े जीर। शुक्र कहे मोहि दही की पीर॥
कहै शनि अदरख पाऊं। सुख संपत्ति निश्चय घर लाऊं॥”

अर्थात् किसी भी शुभ कार्य व यात्रा हेतु घर से निकलने के पूर्व

रविवार को पान का खाकर,
सोमवार को दर्पण देखकर,
मंगलवार को गुड़ खाकर,
बुधवार को खड़ा धनिया खाकर,
शुक्रवार को दही का सेवन करे,
शनिवार को अदरक

खाकर जाने से कार्य में पूर्ण सफलता प्राप्त होती है।

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